पहली बार हेल्थ इंश्योरेंस लेते समय इन गलतियों से बचें, वरना क्लेम के समय हो सकती है परेशानी


 दिल्ली: हेल्थ इंश्योरेंस आज के समय में एक महत्वपूर्ण वित्तीय सुरक्षा कवच बन चुका है। लेकिन पहली बार पॉलिसी खरीदने वाले कई लोग ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिनका खामियाजा उन्हें मेडिकल इमरजेंसी के समय उठाना पड़ता है। कम प्रीमियम के लालच में कम कवरेज चुनना, पॉलिसी की शर्तों को ठीक से न पढ़ना और प्रतीक्षा अवधि (वेटिंग पीरियड) को नजरअंदाज करना जैसी गलतियां बाद में बड़े आर्थिक नुकसान का कारण बन सकती हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, हेल्थ इंश्योरेंस खरीदते समय केवल प्रीमियम पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। यह समझना जरूरी है कि पॉलिसी कितना कवरेज देती है, किन बीमारियों पर वेटिंग पीरियड लागू है, कौन-सी स्थितियां कवर नहीं होतीं (एक्सक्लूज़न), रिन्यूअल के नियम क्या हैं और भविष्य में कवरेज बढ़ाने की सुविधा उपलब्ध है या नहीं।पहली बार पॉलिसी खरीदने वाले लोगों को अपनी जरूरत के अनुसार पर्याप्त सम इंश्योर्ड चुनना चाहिए ताकि गंभीर बीमारी या बड़े इलाज के दौरान जेब से अधिक खर्च न करना पड़े।

 साथ ही, पहले से मौजूद बीमारियों, मैटरनिटी और अन्य विशेष उपचारों पर लागू वेटिंग पीरियड की जानकारी पहले ही ले लेनी चाहिए।विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि पॉलिसी के एक्सक्लूज़न यानी किन उपचारों और परिस्थितियों में क्लेम नहीं मिलेगा, इसे ध्यान से पढ़ें। इसके अलावा, समय-समय पर पॉलिसी की समीक्षा कर जरूरत के अनुसार कवरेज बढ़ाना और रिन्यूअल के नियम समझना भी जरूरी है।हेल्थ इंश्योरेंस चुनने से पहले विभिन्न कंपनियों के प्लान, अस्पताल नेटवर्क, क्लेम सेटलमेंट रिकॉर्ड, ग्राहक सेवा और उपलब्ध ऐड-ऑन सुविधाओं की तुलना करना समझदारी भरा कदम माना जाता है। 

इससे व्यक्ति अपनी जरूरत और बजट के अनुसार बेहतर पॉलिसी का चयन कर सकता है।विशेषज्ञों का मानना है कि सही हेल्थ इंश्योरेंस वही है, जो सिर्फ कम प्रीमियम वाला न होकर आपकी वर्तमान और भविष्य की स्वास्थ्य जरूरतों के अनुरूप पर्याप्त सुरक्षा प्रदान करे। पॉलिसी खरीदने से पहले उसकी सभी शर्तों को अच्छी तरह समझना भविष्य में आर्थिक और मानसिक परेशानी से बचा सकता है।

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