जमशेदपुर। कांग्रेस की ओर से चुनाव प्रक्रिया और ‘वोट चोरी’ को लेकर लगाए जा रहे आरोपों के बीच भाजपा ने पलटवार किया है। सोमवार को भाजपा जमशेदपुर महानगर के साकची स्थित जिला कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में प्रदेश प्रवक्ता अभय सिंह ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए चुनाव आयोग की विश्वसनीयता और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर भाजपा का पक्ष रखा।
अभय सिंह ने कहा कि चुनाव में हार के बाद चुनाव आयोग और चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाने के बजाय कांग्रेस को अपने संगठन और राजनीतिक रणनीति की समीक्षा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में चुनाव का परिणाम मतदाताओं के निर्णय से तय होता है और राजनीतिक दलों को जनादेश का सम्मान करना चाहिए।
उन्होंने बिहार समेत विभिन्न राज्यों में कांग्रेस के लंबे समय से सत्ता से बाहर रहने का उल्लेख करते हुए कहा कि हर चुनाव के बाद ‘वोट चोरी’ का आरोप लगाने से चुनावी प्रक्रिया और जनादेश को लेकर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस के पास चुनावी अनियमितता के ठोस प्रमाण हैं तो उन्हें संबंधित संवैधानिक संस्थाओं के समक्ष दस्तावेजों के साथ रखा जाना चाहिए।
चुनाव आयोग को लेकर एमएस गिल का उदाहरण
अभय सिंह ने चुनाव आयोग की स्वायत्तता का उल्लेख करते हुए पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त डॉ. एम.एस. गिल का उदाहरण दिया। चुनाव आयोग के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार गिल 12 दिसंबर 1996 से 13 जून 2001 तक मुख्य निर्वाचन आयुक्त रहे थे।
अभय सिंह ने कहा कि गिल के बाद कांग्रेस से जुड़े राजनीतिक जीवन का उदाहरण देते हुए कांग्रेस से पूछा जाना चाहिए कि संवैधानिक पद पर रहे अधिकारियों के बाद के राजनीतिक संबंधों को लेकर पार्टी का दृष्टिकोण क्या रहा है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग पर सवाल उठाने से पहले कांग्रेस को अपने अतीत को भी देखना चाहिए।
वहीं, वर्तमान मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने 19 फरवरी 2025 को 26वें मुख्य निर्वाचन आयुक्त के रूप में पदभार संभाला था। चुनाव आयोग के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार आयोग लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा सहित विभिन्न चुनावों के संचालन की संवैधानिक जिम्मेदारी निभाता है।
SIR को लेकर कांग्रेस से सहयोग की अपील
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर भी कांग्रेस पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची को अद्यतन और अधिक विश्वसनीय बनाने की प्रक्रिया में राजनीतिक दलों को सहयोग करना चाहिए।
चुनाव आयोग के अनुसार बिहार में SIR के दौरान मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त बूथ लेवल एजेंटों को प्रशिक्षण और प्रक्रिया में भागीदारी का अवसर दिया गया था। आयोग ने राजनीतिक दलों को चुनावी प्रक्रिया के विभिन्न चरणों में सक्रिय भागीदारी की अपील भी की थी।
अभय सिंह ने कहा कि यदि किसी पात्र मतदाता का नाम छूटा है तो संबंधित बूथ लेवल एजेंट को तथ्य और दस्तावेजों के साथ निर्वाचन अधिकारियों के समक्ष दावा या आपत्ति दर्ज करानी चाहिए। वहीं मृत, स्थानांतरित या एक से अधिक स्थानों पर दर्ज मतदाताओं के नामों को नियमानुसार दुरुस्त करने की प्रक्रिया में सहयोग किया जाना चाहिए।
घुसपैठ और मतदाता सूची पर सवाल
अभय सिंह ने बांग्लादेशी और पाकिस्तानी घुसपैठ के आरोपों का उल्लेख करते हुए कहा कि नागरिकता और मतदाता पहचान से जुड़े किसी भी संदिग्ध मामले की जांच कानून के तहत होनी चाहिए। उन्होंने साहिबगंज, पाकुड़, दुमका, गोड्डा, जामताड़ा और कोल्हान समेत झारखंड के विभिन्न क्षेत्रों का उल्लेख किया।
उन्होंने जमशेदपुर के गोलमुरी क्षेत्र में कथित तौर पर तीन अफगानी नागरिकों से जुड़े वोटर आईडी कार्ड मिलने के मामले का भी जिक्र किया और कहा कि इसकी जांच होनी चाहिए। यह दावा प्रेस वार्ता में अभय सिंह द्वारा किया गया है; इसकी स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं की गई है।
‘जनता के फैसले का सम्मान करे कांग्रेस’
अभय सिंह ने कहा कि यदि कांग्रेस को मतदाता सूची या चुनाव प्रक्रिया में किसी प्रकार की गंभीर अनियमितता की जानकारी है तो उसे प्रमाण और दस्तावेजों के साथ संबंधित संवैधानिक संस्था के समक्ष रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों का समाधान तथ्य और वैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से होना चाहिए।
उन्होंने राहुल गांधी और कांग्रेस की चुनावी रणनीति पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि पार्टी को चुनाव परिणामों के बाद संगठन और नीतियों की समीक्षा करनी चाहिए।
प्रेस वार्ता में भाजपा जमशेदपुर महानगर अध्यक्ष संजीव सिन्हा, जिला मीडिया प्रभारी प्रेम झा और वरिष्ठ भाजपा नेता अंजन सरकार मौजूद रहे।
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