हिमांशु हत्याकांड के बाद बदली जमशेदपुर की पुलिसिंग: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के हस्तक्षेप के बाद पुलिस महकमे में बड़ा फेरबदल के बाद , नए एसएसपी डॉ एहतेशाम वकारिब के नेतृत्व में अपराधियों पर कसा शिकंजा

जमशेदपुर: चर्चित हिमांशु हत्याकांड के बाद जमशेदपुर की कानून-व्यवस्था पूरे राज्य में चर्चा का विषय बन गई। घटना के बाद राज्य सरकार ने शहर की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीरता दिखाई। 

इसके बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के हस्तक्षेप और निर्देशों के बाद पुलिस प्रशासन में महत्वपूर्ण फेरबदल किए गए। इसी क्रम में तत्कालीन वरीय पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) पियूष पांडेय का तबादला कर आईपीएस अधिकारी डॉ एहतेशाम वकारिब को जमशेदपुर का नया एसएसपी नियुक्त किया गया।

 प्रशासनिक स्तर पर इस बदलाव को अपराध नियंत्रण और पुलिस व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में अहम कदम माना गया। एसएसपी के पदभार ग्रहण करने के बाद पुलिसिंग की कार्यशैली में भी बदलाव देखने को मिला। अपराध नियंत्रण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए विभिन्न थाना क्षेत्रों में विशेष अभियान शुरू किए गए। 

इसी दौरान बिष्टुपुर थाना में भी नेतृत्व परिवर्तन करते हुए थाना प्रभारी आलोक दुबे के स्थान पर निरंजन कुमार को नई जिम्मेदारी सौंपी गई। 

हिमांशु हत्याकांड की जांच के दौरान सिटी एसपी ललित मीणा ने स्वयं सड़क पर बैठकर पीड़ित परिवार से मुलाकात की और उन्हें निष्पक्ष जांच एवं न्याय का भरोसा दिलाया। इस दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस लगातार क्षेत्र में सक्रिय रही। 

घटना के क्रम में पुलिस पर भी हमला हुआ और सिटी एसपी ललित मीणा के सरकारी वाहन पर पथराव किया गया। इसके बावजूद पुलिस टीम ने संयम बनाए रखते हुए जांच और कार्रवाई जारी रखी। हत्याकांड की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने तकनीकी अनुसंधान, सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन, वैज्ञानिक साक्ष्यों और लगातार छापेमारी के आधार पर मामले की कड़ियां जोड़ते हुए सभी आरोपियों तक पहुंच बनाई। 

पुलिस की लगातार दबिश के चलते कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि कुछ आरोपियों ने गिरफ्तारी की आशंका के बीच न्यायालय में आत्मसमर्पण किया। वहीं कुछ आरोपियों ने बिष्टुपुर थाना पहुंचकर भी आत्मसमर्पण किया। इस मामले में सभी आरोपियों को कानून के दायरे में लाना जमशेदपुर पुलिस की बड़ी उपलब्धि माना गया।

नए एसएसपी के कार्यभार संभालने के बाद शहर में अपराधियों के खिलाफ अभियान और तेज कर दिए गए। पुलिस ने ट्रैफिक जांच की व्यवस्था में बदलाव करते हुए मानव संसाधनों का अधिक उपयोग अपराध नियंत्रण के लिए किया। हेलमेट जांच जारी रखते हुए पुलिस का मुख्य फोकस संगठित अपराध, रंगदारी, अवैध वसूली और सक्रिय अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई पर रहा।इसके साथ ही शहरभर में रंगदारी (एडेबाजी) के खिलाफ विशेष अभियान चलाया गया। 

देर रात शहर में आने-जाने वाले संदिग्ध व्यक्तियों की सघन जांच शुरू हुई। अवैध लॉटरी के कारोबार पर लगातार कार्रवाई की गई। कई थाना क्षेत्रों में अपराधियों की धरपकड़ के लिए छापेमारी अभियान चलाए गए तथा वारंटियों की गिरफ्तारी भी तेज की गई। संवेदनशील इलाकों में पुलिस गश्त बढ़ाई गई और रात्रि पेट्रोलिंग को पहले से अधिक प्रभावी बनाया गया।

पुलिस प्रशासन का कहना है कि शहर में आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना, अपराधियों में कानून का भय कायम करना और कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाए रखना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। अधिकारियों के अनुसार अपराध नियंत्रण को लेकर विशेष अभियान आगे भी जारी रहेगा और किसी भी आपराधिक गतिविधि में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।.हिमांशु हत्याकांड के बाद हुए इन प्रशासनिक और पुलिसिंग बदलावों के बीच शहर में अपराध नियंत्रण को लेकर पुलिस की सक्रियता पहले की तुलना में अधिक दिखाई दे रही है। 

हालांकि, कानून-व्यवस्था की स्थिति का अंतिम आकलन समय के साथ अपराध के आधिकारिक आंकड़ों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही किया जा सकेगा। फिलहाल पुलिस प्रशासन का दावा है कि जमशेदपुर में शांति व्यवस्था बनाए रखने और अपराध पर प्रभावी नियंत्रण के लिए लगातार कार्रवाई जारी है।

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