जमशेदपुर। पूर्वी सिंहभूम के बहुचर्चित सांसद सुनील महतो हत्याकांड को लेकर करीब 19 साल बाद एक बार फिर महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। पश्चिम बंगाल पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण करने वाले प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) के पूर्व जोनल कमांडर रामप्रसाद मार्डी उर्फ सचिन ने पुलिस पूछताछ में दावा किया है कि वर्ष 2007 में सांसद सुनील महतो की हत्या संगठन के शीर्ष नेतृत्व के निर्देश पर की गई थी।
सचिन के बयान के अनुसार, इतनी बड़ी वारदात का फैसला किसी एक व्यक्ति के स्तर पर नहीं लिया जाता था, बल्कि पोलित ब्यूरो और सेंट्रल कमेटी स्तर के नेताओं की भूमिका होती थी। हत्याकांड में दर्जनभर से अधिक नक्सलियों की भूमिका का दावापुलिस पूछताछ के दौरान सचिन ने कथित तौर पर बताया कि सांसद सुनील महतो की हत्या में दर्जनभर से अधिक माओवादी शामिल थे।
उसने अपनी संलिप्तता स्वीकार करते हुए यह भी कहा कि उसने स्वयं सांसद पर गोली नहीं चलाई थी। उसके अनुसार, रंजीत पाल उर्फ राहुल समेत अन्य नक्सलियों ने सांसद पर गोली चलाई थी। घटना के बाद वह पश्चिम बंगाल के लालगढ़ इलाके में चला गया था। यह जानकारी ऐसे समय सामने आई है जब सुनील महतो हत्याकांड से जुड़े कई आरोपी या संदिग्ध नक्सली अलग-अलग समय पर पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर चुके हैं
अगस्त 2026 में 15 लाख रुपये के इनामी माओवादी मदन महतो की गिरफ्तारी के बाद भी इस हत्याकांड की साजिश और घटना में शामिल लोगों की भूमिका को लेकर कई जानकारियां सामने आई थीं। 4 मार्च 2007 को बाघुड़िया में हुई थी हत्यासुनील महतो की हत्या 4 मार्च 2007 को पूर्वी सिंहभूम के घाटशिला क्षेत्र के बाघुड़िया में आयोजित फुटबॉल कार्यक्रम के दौरान की गई थी।
वे कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे थे। इसी दौरान नक्सलियों ने गोलीबारी कर दी। हमले में सांसद सुनील महतो के अलावा उनके दो अंगरक्षक और झामुमो नेता प्रभाकर महतो की भी मौत हुई थी। घटना के बाद यह मामला झारखंड के सबसे चर्चित राजनीतिक-नक्सली हत्याकांडों में शामिल हो गया। शुरुआती जांच स्थानीय पुलिस ने की। बाद में जांच अलग-अलग केंद्रीय एजेंसियों तक पहुंची।
सुनील महतो की पत्नी सुमन महतो के अनुसार, मामले की जांच सीआईडी, सीबीआई और बाद में एनआईए तक पहुंची तथा सीबीआई ने आरोपपत्र भी दाखिल किया। लालगढ़ में किशनजी के साथ रहा सचिनपूछताछ में सचिन ने अपनी नक्सली गतिविधियों के बारे में भी जानकारी दिए जाने की बात सामने आई है।
रिपोर्ट के अनुसार, सुनील महतो हत्याकांड के बाद वह पश्चिम बंगाल के लालगढ़ चला गया और वहां माओवादी नेता किशनजी के साथ करीब चार साल तक रहा। किशनजी की मौत के बाद सचिन दोबारा झारखंड लौटा और पटमदा, एमजीएम, गालूडीह तथा घाटशिला क्षेत्र में सक्रिय रहा। रिपोर्ट के मुताबिक, सचिन का मुख्य कार्यक्षेत्र पश्चिम बंगाल रहा, लेकिन संगठन के निर्देश पर उसने झारखंड के सारंडा, खूंटी और दलमा जैसे क्षेत्रों में भी काम किया।
संगठन की आर्थिक व्यवस्था को लेकर भी जानकारीपूछताछ में सचिन ने माओवादी संगठन की आर्थिक व्यवस्था और हथियारों से जुड़ी गतिविधियों के बारे में भी जानकारी दी। उसके अनुसार, संगठन को लेवी के माध्यम से रकम मिलती थी और उसका बड़ा हिस्सा हथियारों के लिए इस्तेमाल होने वाली गोलियों की खरीद में खर्च होता था।
रिपोर्ट में सचिन के हवाले से बताया गया है कि एक गोली के लिए करीब 500 रुपये तक खर्च करने पड़ते थे। संगठन की रकम से वर्दी, कपड़े और दवाइयां भी खरीदी जाती थीं। सचिन ने कथित तौर पर बताया कि हथियार कई बार पुलिस जवानों से लूटकर हासिल किए जाते थे, जबकि गोलियों की खरीद के लिए अलग से रकम खर्च करनी पड़ती थी।
हथियार छिपाने के तरीके का भी खुलासासचिन ने हथियारों को सुरक्षित रखने के तरीके के बारे में भी जानकारी दिए जाने की बात सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, हथियारों को पानी के पटवन में इस्तेमाल होने वाले डिलीवरी पाइप में डालकर जमीन में गाड़ दिया जाता था। उसके मुताबिक, इस तरीके से हथियार करीब दो साल तक सुरक्षित रखे जा सकते थे।
आत्मसमर्पण के बाद झारखंड लाने की कवायद सचिन ने हाल में पश्चिम बंगाल में आत्मसमर्पण किया है। रिपोर्ट के अनुसार, पूर्वी सिंहभूम में उसके खिलाफ पुराने मामले दर्ज हैं और झारखंड पुलिस उससे पूछताछ करना चाहती है। सचिन के अलावा उसकी पत्नी मीता और बुलू के भी पश्चिम बंगाल में आत्मसमर्पण करने की जानकारी सामने आई है।
झारखंड पुलिस इन लोगों को कानूनी प्रक्रिया के तहत राज्य में लाकर पुराने नक्सली मामलों के संबंध में पूछताछ करने की कवायद में है। 19 साल बाद भी कई सवाल बाकीसुनील महतो हत्याकांड को 19 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन घटना की पूरी साजिश और सभी आरोपियों की भूमिका को लेकर अब भी कई सवाल बने हुए हैं।
अगस्त 2026 में गिरफ्तार किए गए 15 लाख के इनामी माओवादी मदन महतो से पूछताछ में भी घटना से जुड़े लोगों की आवाजाही और वारदात के बाद नक्सलियों को सुरक्षित निकालने की भूमिका की जानकारी सामने आने की रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी।
वहीं, सुनील महतो की पत्नी सुमन महतो ने हाल में कहा कि परिवार को 19 साल बाद भी न्याय का इंतजार है। उन्होंने दावा किया कि मामले की जांच कई एजेंसियों ने की, लेकिन हत्याकांड से जुड़े सभी सवालों का अंतिम जवाब अभी सामने नहीं आया है।
सचिन के पुलिस पूछताछ में दिए गए बयान को जांच का एक पक्ष माना जा रहा है। इन दावों की अंतिम कानूनी पुष्टि अदालत में साक्ष्यों और जांच के आधार पर ही होगी।
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