जमशेदपुर: हिन्दू पीठ जमशेदपुर के एक प्रतिनिधिमंडल ने अध्यक्ष अरुण सिंह के नेतृत्व में बुधवार को जमशेदपुर के उपायुक्त से मुलाकात कर शहर के प्रमुख विसर्जन घाटों पर सुरक्षा, पर्याप्त रोशनी और गोताखोरों की व्यवस्था करने की मांग की।
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि जमशेदपुर में देश के विभिन्न राज्यों और प्रांतों के लोग निवास करते हैं, इसलिए इसे ‘लघु भारत’ भी कहा जाता है। शहर में वर्षभर अनेक धार्मिक आयोजन होते हैं, जिनमें देवी-देवताओं की प्रतिमाओं की पूजा-अर्चना के बाद नदी घाटों पर विसर्जन किया जाता है।
हिन्दू पीठ ने कहा कि इस वर्ष लगातार बारिश के कारण स्वर्णरेखा नदी का जलस्तर बढ़ा हुआ है। वहीं, अधिकांश विसर्जन घाटों का तट गीला और फिसलन भरा हो गया है। ऐसे में आगामी गणेश पूजा और विश्वकर्मा पूजा के दौरान प्रतिमा विसर्जन में श्रद्धालुओं को परेशानी के साथ-साथ दुर्घटना का खतरा भी बना हुआ है।
प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि इस वर्ष गणेश पूजा 14 सितंबर तथा विश्वकर्मा पूजा 17-18 सितंबर को मनाई जाएगी। इसे देखते हुए शहर के प्रमुख विसर्जन घाटों पर पहले से ही सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की जरूरत है।हिन्दू पीठ ने विशेष रूप से स्वर्णरेखा घाट, साकची को मॉडल घाट के रूप में विकसित करने की मांग की।
प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि जमशेदपुर शहर में कई विसर्जन घाट हैं, लेकिन वर्तमान में एक भी घाट को मॉडल घाट के रूप में विकसित नहीं किया गया है।
साकची स्थित स्वर्णरेखा घाट का उपयोग बड़ी संख्या में श्रद्धालु करते हैं और यहां जलभरी एवं प्रतिमा विसर्जन भी बड़े स्तर पर होता है।हिन्दू पीठ ने उपायुक्त से स्वर्णरेखा घाट साकची तक जाने वाले मार्ग पर पर्याप्त लाइटिंग, घाट पर सुरक्षा व्यवस्था तथा प्रशिक्षित गोताखोरों की तैनाती सुनिश्चित करने का आग्रह किया, ताकि गणेश एवं विश्वकर्मा पूजा की प्रतिमाओं के विसर्जन के दौरान श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो और किसी अप्रिय घटना की संभावना को रोका जा सके।प्रतिनिधिमंडल में हिन्दू पीठ के महासचिव दिलजय बोस, सुरक्षा प्रमुख सोमनाथ सिंह एवं ज्योत्सना सरकार शामिल थीं।
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