मंत्री का रिश्तेदार होने का हवाला देकर ट्रैफिक पुलिस पर दबाव बनाने की चर्चा, आखिर आम लोगों और रसूखदारों के लिए अलग-अलग हैं नियम?
जमशेदपुर: शहर में ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई के दौरान एक नया विवाद सामने आया है। आरोप है कि कुछ लोग ट्रैफिक पुलिस की कार्रवाई के बाद जब्त वाहनों को छुड़ाने के लिए अपने प्रभाव और राजनीतिक संबंधों का हवाला देते हैं।
ताजा मामला साकची इलाके का बताया जा रहा है, जहां चंपारण होटल से जुड़े एक व्यक्ति पर ट्रैफिक पुलिस के सामने अपना प्रभाव दिखाने और गाड़ी छुड़ाने के लिए दबाव बनाने का आरोप लगा है। बताया जा रहा है कि उक्त व्यक्ति खुद को होटल मालिक का भाई बताते हुए पुलिसकर्मियों पर अपना प्रभाव जमाने की कोशिश कर रहा था। इतना ही नहीं, झारखंड सरकार के एक मंत्री का रिश्तेदार होने का हवाला देकर भी अपना रसूख दिखाने की बात सामने आ रही है।
हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या जमशेदपुर में ट्रैफिक नियमों का पालन सभी के लिए समान है? यदि कोई आम नागरिक नियम तोड़ता है तो उसे जुर्माना भरना पड़ता है, लेकिन क्या राजनीतिक पहुंच और रिश्तेदारी का हवाला देकर कोई अपनी गाड़ी छुड़वा सकता है?
ट्रैफिक व्यवस्था कानून से चलनी चाहिए, किसी के रसूख से नहीं। अब देखना होगा कि ट्रैफिक पुलिस के वरीय अधिकारी इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं।
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भाई साहब, मेरी गाड़ी सुरक्षित है ना?
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