चौका में पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा के सुरक्षा काफिले का वाहन दुर्घटनाग्रस्त, सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए गंभीर सवाल


कई बार पत्र लिखने के बावजूद नहीं बदली जर्जर वाहनों की स्थिति, बोले- क्या बड़ी दुर्घटना के बाद ही जागेंगे जिम्मेदार अधिकारी?

चांडिल/जमशेदपुर: खूंटी से जमशेदपुर जाने के दौरान शुक्रवार को एनएच-33 स्थित चौका के बड़ामटांड़ के समीप पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा के सुरक्षा काफिले में शामिल एक वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हालांकि, इस हादसे में अर्जुन मुंडा समेत उनकी सुरक्षा में तैनात किसी भी जवान को चोट नहीं आई। दुर्घटना के बाद अर्जुन मुंडा ने ईश्वर के प्रति आभार जताते हुए राज्य सरकार की सुरक्षा व्यवस्था और काफिले में इस्तेमाल हो रहे वाहनों की जर्जर स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

अर्जुन मुंडा ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा सुरक्षा व्यवस्था के लिए उपलब्ध कराए जा रहे वाहनों की हालत बेहद खराब है। यह केवल उनकी सुरक्षा का मामला नहीं, बल्कि दिन-रात ड्यूटी करने वाले सुरक्षाकर्मियों के जीवन से भी जुड़ा गंभीर विषय है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके कार्यालय की ओर से कई बार संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखकर वाहनों की जर्जर स्थिति, बार-बार होने वाली तकनीकी खराबियों और सुरक्षा पर पड़ रहे प्रभाव की जानकारी दी गई, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया।

उन्होंने बताया कि इस संबंध में 28 जुलाई 2024 को पत्रांक 10453, 22 अगस्त 2024 को 10476, 19 अप्रैल 2025 को 10740, 11 सितंबर 2025 को 10905, 9 मार्च 2026 को 11133 और 29 जून 2026 को 11298 के माध्यम से पत्राचार किया गया। इसके अलावा गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने भी 14 मार्च 2026 को पत्रांक 08/सुरक्षा(II)-01/2025, ज्ञापांक 1645 के जरिए आवश्यक कार्रवाई के लिए पत्र जारी किया था। इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि जर्जर वाहनों की केवल सामान्य मरम्मत कर उन्हें दोबारा सुरक्षा काफिले में लगा दिया जाता है, जबकि कुछ ही दिनों बाद उनमें फिर तकनीकी खराबियां आने लगती हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विभाग की ओर से अब तक सुरक्षा व्यवस्था की समुचित समीक्षा नहीं की गई है।

अर्जुन मुंडा ने सुरक्षा काफिले में इस्तेमाल हो रहे पुराने वाहनों पर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि वाहनों में सायरन और झंडे जैसी आवश्यक पहचान की व्यवस्था नहीं होने से दूसरे वाहन चालकों को कारकेड का पता नहीं चल पाता। कई बार अन्य वाहन काफिले के बीच में प्रवेश कर जाते हैं, जिससे सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि शायद ही कोई ऐसा दिन गुजरता हो, जब इन वाहनों में तकनीकी समस्या सामने नहीं आती हो।

उन्होंने सवाल उठाया कि क्या किसी बड़ी दुर्घटना या जनहानि के बाद ही जिम्मेदार अधिकारियों की नींद खुलेगी? अर्जुन मुंडा ने राज्य सरकार से तत्काल संज्ञान लेने की मांग करते हुए कहा कि सुरक्षा काफिले में निर्धारित मानकों के अनुरूप सुरक्षित और तकनीकी रूप से दुरुस्त वाहन उपलब्ध कराए जाने चाहिए, ताकि किसी अप्रिय घटना से बचा जा सके।

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