सिर्फ सामान्य भूलने की आदत या अल्जाइमर का शुरुआती संकेत? विशेषज्ञ ने बताए शुरुआती लक्षण, समय पर जांच की दी सलाह


जमशेदपुर। कभी चश्मा या मोबाइल रखकर भूल जाना, किसी कमरे में जाने के बाद यह याद न रहना कि वहां क्यों आए थे या किसी परिचित का नाम कुछ देर के लिए याद न आना—ऐसी छोटी-छोटी भूलें सामान्य जीवन का हिस्सा हो सकती हैं। 

लेकिन अगर भूलने की समस्या लगातार बढ़ रही हो और उसका असर रोजमर्रा के कामकाज पर पड़ने लगे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ब्रह्मानंद नारायण हॉस्पिटल, जमशेदपुर के सीनियर कंसल्टेंट, न्यूरोलॉजी, डॉ. अरुण कुमार के अनुसार, सिर्फ चीजें भूल जाना डिमेंशिया या अल्जाइमर का संकेत नहीं माना जा सकता। 

डिमेंशिया मानसिक क्षमताओं में ऐसी लगातार गिरावट है, जो व्यक्ति के दैनिक जीवन को प्रभावित करने लगे, जबकि अल्जाइमर एक ऐसी बीमारी है जिसमें मस्तिष्क की कार्यक्षमता धीरे-धीरे कमजोर होती जाती है।अल्जाइमर के शुरुआती संकेतों को समझना जरूरीचूंकि भूलने की समस्या कई कारणों से हो सकती है, इसलिए कुछ ऐसे संकेत हैं जिन पर परिवार के सदस्यों को विशेष ध्यान देना चाहिए!

हाल की घटनाओं को याद न रख पाना:चाबी कहां रखी थी, यह भूल जाना और थोड़ी देर बाद उसका पता चल जाना सामान्य हो सकता है। लेकिन अल्जाइमर में हाल ही में हुई घटनाओं या सीखी गई जानकारी को याद रखने में लगातार परेशानी हो सकती है। नई यादें बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले मस्तिष्क के हिस्सों में होने वाले बदलाव इसके पीछे एक कारण हो सकते हैं।

एक ही सवाल या बात बार-बार दोहराना:परिवार के सदस्य अक्सर इस बदलाव को शुरुआती संकेतों में से एक के रूप में नोटिस करते हैं। व्यक्ति एक ही सवाल बार-बार पूछ सकता है क्योंकि पिछली बातचीत की जानकारी उसकी याददाश्त में ठीक से दर्ज नहीं हुई होती।

परिचित जगहों पर रास्ता भूलना:अगर कोई व्यक्ति अपने परिचित इलाके में भी रास्ता पहचानने या वहां पहुंचने में परेशानी महसूस करने लगे, तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए। इसे स्थानिक दिशाभ्रम (Spatial Disorientation) कहा जाता है और यह सामान्य भूलने की आदत से अलग हो सकता है।

समय को लेकर दिशाभ्रम:कभी-कभार सप्ताह का दिन भूल जाना सामान्य हो सकता है। लेकिन अगर व्यक्ति लगातार वर्तमान महीना या वर्ष भूलने लगे अथवा किसी घटना के बाद कितना समय बीत चुका है, इसका अंदाजा लगाने में परेशानी हो, तो चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है।बातचीत या निर्देशों को समझने में परेशानी:फिल्म या किताब की कहानी का क्रम समझने में कठिनाई, बातचीत के दौरान संदर्भ खो देना अथवा किसी रेसिपी या प्रक्रिया के निर्देशों को बार-बार भूलना भी संज्ञानात्मक बदलाव के संकेत हो सकते हैं।

चीजों को असामान्य जगह पर रखना:कभी रिमोट या मोबाइल को गलत जगह रख देना सामान्य है। लेकिन यदि कोई व्यक्ति बार-बार सामान को असामान्य स्थानों पर रखने लगे और बाद में यह समझ भी न पाए कि वह वहां कैसे पहुंचा, तो इस बदलाव पर ध्यान देना चाहिए।समय पर जांच क्यों जरूरी?

अल्जाइमर के शुरुआती लक्षणों को सामान्य भूलने की आदत से अलग करना हमेशा आसान नहीं होता। ऐसे में लक्षण लगातार दिखाई देने पर चिकित्सकीय जांच कराना महत्वपूर्ण हो सकता है।समय पर जांच से कुछ ऐसी स्वास्थ्य समस्याओं का भी पता लगाया जा सकता है, जिनके लक्षण स्मृति और सोचने-समझने की क्षमता में बदलाव के रूप में सामने आ सकते हैं। 

इनमें थायरॉयड संबंधी समस्याएं, विटामिन B12 की कमी, डिप्रेशन और कुछ दवाओं के दुष्प्रभाव शामिल हो सकते हैं।चिकित्सकीय मूल्यांकन में मेमोरी स्क्रीनिंग टेस्ट और आवश्यकता के अनुसार मस्तिष्क की इमेजिंग सहित अन्य जांचों का सहारा लिया जा सकता है।

शुरुआती पहचान से मिल सकता है योजना बनाने का समयअल्जाइमर की समय रहते पहचान होने पर मरीज और परिवार को आगे की चिकित्सा एवं देखभाल की योजना बनाने का अवसर मिलता है। परिवार भविष्य से जुड़े जरूरी निर्णयों पर समय रहते विचार कर सकता है और मरीज की जरूरतों के अनुसार सहायता एवं देखभाल की व्यवस्था कर सकता है।

इसलिए हर भूल को अल्जाइमर मानना सही नहीं है, लेकिन लगातार बढ़ती भूलने की समस्या, बार-बार एक ही बात पूछना, परिचित स्थानों पर रास्ता भूलना या रोजमर्रा के कामों में स्पष्ट बदलाव दिखाई देने पर विशेषज्ञ से सलाह लेना महत्वपूर्ण है।

समय पर पहचान परिवार को सबसे अनमोल चीज दे सकती है—समय। यही समय बेहतर योजना बनाने, उचित चिकित्सा एवं देखभाल शुरू करने और अपने प्रियजन के साथ महत्वपूर्ण पलों को संजोने में मदद कर सकता है।

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