जमशेदपुर। कैंसर अब केवल एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या नहीं, बल्कि परिवारों के लिए बड़ी आर्थिक चुनौती भी बनता जा रहा है। कभी दुर्लभ मानी जाने वाली यह बीमारी आज तेजी से बढ़ते मामलों के कारण भारत के सामने बड़ी स्वास्थ्य चुनौतियों में शामिल है। कैंसर का इलाज लंबे समय तक चल सकता है और सर्जरी, कीमोथेरेपी, रेडिएशन, टार्गेटेड थेरेपी, जांच, विशेषज्ञों की सलाह और नियमित फॉलो-अप पर लाखों रुपये खर्च हो सकते हैं।
श्री विकास गुप्ता, हेड- हेल्थ एडमिनिस्ट्रेशन टीम, बजाज जनरल इंश्योरेंस के अनुसार, वर्ष 2022 में भारत में अनुमानित 14.6 लाख नए कैंसर के मामले सामने आए थे। वहीं 2024 में यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 15.6 लाख नए मामलों तक पहुंच गया और करीब 8.74 लाख लोगों की कैंसर से मौत हुई। ये आंकड़े बताते हैं कि कैंसर से बचाव और समय पर इलाज के साथ-साथ परिवारों के लिए आर्थिक तैयारी भी बेहद जरूरी है।
इलाज बेहतर हुआ, लेकिन खर्च भी बढ़ा
मेडिकल साइंस में हुई प्रगति ने कैंसर के इलाज के परिणामों में काफी सुधार किया है। समय पर बीमारी की पहचान और बेहतर उपचार के कारण मरीजों के लंबे समय तक जीवित रहने और ठीक होने की संभावनाएं बढ़ी हैं। हालांकि, इलाज की प्रक्रिया कई महीनों या वर्षों तक चल सकती है।
सर्जरी से लेकर कीमोथेरेपी, टार्गेटेड थेरेपी, बार-बार होने वाली जांच, विशेषज्ञों से परामर्श और रिकवरी के दौरान होने वाले खर्च परिवार के बजट पर भारी असर डाल सकते हैं। इसके अलावा बीमारी के कारण मरीज की आय प्रभावित होने पर आर्थिक दबाव और बढ़ जाता है।
सामान्य हेल्थ इंश्योरेंस के साथ क्रिटिकल इलनेस कवर क्यों जरूरी?
ऐसे समय में क्रिटिकल इलनेस इंश्योरेंस आर्थिक सुरक्षा का एक अतिरिक्त माध्यम हो सकता है। इसमें पॉलिसी की शर्तों के अनुसार कैंसर सहित कई गंभीर बीमारियों को कवर किया जा सकता है।
कवर की गई बीमारी का निदान होने और निर्धारित शर्तों के अनुसार 30 दिनों तक जीवित रहने पर बीमित व्यक्ति को एकमुश्त राशि मिल सकती है। यह राशि केवल अस्पताल के बिल तक सीमित नहीं होती। इसका इस्तेमाल इलाज, दवाओं, रिहैबिलिटेशन, डोनर से जुड़े खर्च, भारत से बाहर इलाज की योजना अथवा परिवार के रोजमर्रा के खर्चों के लिए किया जा सकता है।
बीमारी के साथ कमाई का नुकसान भी चुनौती
कैंसर का असर केवल मरीज की सेहत पर नहीं पड़ता। लंबे इलाज के दौरान नौकरी या व्यवसाय प्रभावित हो सकता है। परिवार पर बच्चों की पढ़ाई, होम लोन, अन्य कर्ज और रोजमर्रा के खर्चों की जिम्मेदारी बनी रहती है।
क्रिटिकल इलनेस कवर से मिलने वाली एकमुश्त राशि ऐसे समय में आर्थिक सहारा प्रदान कर सकती है। इससे परिवार को इलाज के साथ-साथ दूसरी जरूरी वित्तीय जिम्मेदारियों को संभालने में मदद मिल सकती है।
पहले से आर्थिक तैयारी जरूरी
कैंसर बिना चेतावनी के सामने आ सकता है। इसलिए केवल बीमारी की रोकथाम और इलाज की जानकारी होना पर्याप्त नहीं है। परिवार को यह भी देखना चाहिए कि गंभीर बीमारी की स्थिति में इलाज का खर्च और आय में संभावित कमी कैसे संभाली जाएगी।
पर्याप्त हेल्थ इंश्योरेंस के साथ अपनी जरूरत के अनुसार क्रिटिकल इलनेस कवर पर विचार करना आर्थिक जोखिम को कम करने का एक तरीका हो सकता है। हालांकि किसी भी पॉलिसी को लेने से पहले उसकी कवरेज, बीमारी की परिभाषा, प्रतीक्षा अवधि, अपवर्जन, पात्रता और क्लेम की शर्तों को ध्यान से समझना जरूरी है।
कैंसर के बढ़ते मामलों के बीच जागरूकता का मतलब केवल बीमारी से बचाव और इलाज तक सीमित नहीं रहना चाहिए। स्वास्थ्य के साथ आर्थिक सुरक्षा की तैयारी भी जरूरी है, ताकि मुश्किल समय में मरीज और परिवार का ध्यान इलाज और रिकवरी पर केंद्रित रह सके।
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